कब्ज, गैस और एसिडिटी के घरेलू उपाय. Home remedies for constipation, gas and acidity.

कब्ज, गैस और एसिडिटी के घरेलू उपाय. Home remedies for constipation, gas and acidity.


कब्ज, गैस और एसिडिटी के घरेलू उपाय. Home remedies for constipation, gas and acidity.


आजकल की अनियमित जीवनशैली, गलत खानपान और तनाव के कारण कब्ज, गैस और एसिडिटी बहुत सामान्य समस्या बन चुकी हैं। ये समस्याएँ छोटी जरूर लगती हैं, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी को काफी प्रभावित कर देती हैं। हालांकि,अच्छी बात यह है कि इनका समाधान हमारे घर में ही मौजूद है। ऐसे कई घरेलू नुस्खे हैं जो पेट को तुरंत राहत देते हैं, पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और दोबारा परेशानी होने से रोकते हैं। इस लेख में हम कब्ज, गैस और एसिडिटी से छुटकारा पाने के सबसे असरदार और आसानी से अपनाए जाने वाले घरेलू उपायों के बारे में विस्तार से जानेंगे।


कब्ज क्या है?

कब्ज एक ऐसी पाचन समस्या है जिसमें व्यक्ति को मल त्याग करने में कठिनाई होती है। जब आंतों की गति धीमी हो जाती है और मल कठोर या सूखा हो जाता है, तब यह समस्या उत्पन्न होती है। कब्ज होने पर पेट भरा–भरा महसूस होता है, भूख कम लगती है और पेट दर्द भी हो सकता है। यह समस्या गलत खानपान, पानी कम पीने, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण तेजी से बढ़ती है। यदि लगातार 2–3 दिन तक पेट साफ न हो, तो इसे कब्ज माना जाता है। यह एक आम समस्या है, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर गंभीर पाचन समस्याएँ पैदा कर सकती है।

कब्ज, गैस और एसिडिटी के घरेलू उपाय. Home remedies for constipation, gas and acidity.


कब्ज के मुख्य कारण:

कब्ज आमतौर पर अनियंत्रित जीवनशैली और गलत खानपान से उत्पन्न होती है। फाइबर की कमी वाला भोजन, तला–भुना खाना, पानी कम पीना और देर रात भारी भोजन करना इसके प्रमुख कारण हैं। शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक बैठे रहना, तनाव, दवाइयों के दुष्प्रभाव और नींद की कमी भी कब्ज को बढ़ाते हैं। कई बार उम्र बढ़ने, गर्भावस्था या हार्मोनल बदलावों से भी आंतों की गति धीमी हो जाती है, जिससे मल त्याग मुश्किल हो जाता है। समय पर शौच न जाना या मल को रोकना भी कब्ज को जन्म देता है।


कब्ज के लक्षण:

कब्ज के मुख्य लक्षणों में पेट भारी लगना, मल कड़ा होना, मल त्याग में दर्द या कठिनाई, पेट में ऐंठन और गैस बनना शामिल है। कई बार पेट पूरी तरह साफ न होने की भावना भी महसूस होती है। भूख कम लगना, मुंह कड़वा होना और शरीर में आलस या थकान भी कब्ज के संकेत हो सकते हैं। लगातार कब्ज रहने से piles या fissure जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। यदि दो से तीन दिनों तक पेट साफ न हो और उपरोक्त लक्षण बने रहें, तो इसे लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

गैस क्या है?:

गैस पाचन तंत्र में बनने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब आंतों में गैस अत्यधिक मात्रा में जमा हो जाती है, तो यह समस्या बन जाती है। भोजन पचने के दौरान आंतों में हवा बनती है और कभी-कभी यह बाहर नहीं निकल पाती, जिससे पेट फूलना, डकारें और असहजता होती है। गलत खानपान, जल्दी–जल्दी खाना, पाचन शक्ति कमजोर होना और ज्यादा तैलीय भोजन गैस की समस्या को बढ़ाते हैं। यह समस्या कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन अधिक होने पर पेट दर्द और भारीपन के कारण दैनिक कार्यों को प्रभावित कर सकती है।


गैस बनने के कारण:

गैस बनने के प्रमुख कारणों में जल्दी खाना, कम चबाकर निगलना, भारी तैलीय भोजन, दालें, छोले, राजमा और सोडा जैसे कार्बोनेटेड पेय शामिल हैं। पाचन एंजाइम की कमी, कब्ज, अनियमित खानपान और देर रात खाना भी गैस को बढ़ाते हैं। तनाव, अधिक चाय–कॉफी, धूम्रपान और शराब सेवन भी आंतों में हवा पैदा करते हैं। कुछ लोगों को दूध या कुछ खाद्य पदार्थों से एलर्जी होती है, जिससे गैस जल्दी बनती है। पेट में भोजन का लंबे समय तक रुकना या भारी भोजन करना गैस का मुख्य कारण माना जाता है।


गैस के लक्षण:

गैस के सामान्य लक्षणों में पेट फूलना, लगातार डकारें आना, सीने में हल्का दर्द, पेट में ऐंठन और भारीपन शामिल हैं। कई बार गैस के कारण सीने में जलन और सांस लेने में तकलीफ भी महसूस हो सकती है। पेट में गुड़गुड़ाहट की आवाज, भूख कम लगना और बार-बार पेट फूलना भी इसके संकेत होते हैं। गैस ज्यादा बढ़ने पर दर्द पीठ और छाती तक फैल सकता है, जिससे हार्ट संबंधी समस्या होने का भ्रम भी पैदा हो सकता है। हालांकि यह गंभीर स्थिति नहीं है, लेकिन लगातार गैस रहना पाचन प्रणाली की कमजोरी का संकेत है।


एसिडिटी क्या है?

एसिडिटी एक पाचन समस्या है जिसमें पेट में बन रहा एसिड भोजन नली की ओर ऊपर बढ़ जाता है। इससे सीने में जलन, खट्टी डकारें और गले में जलन महसूस होती है। जब पेट में एसिड की मात्रा जरूरत से अधिक बनती है, तब यह समस्या बढ़ जाती है। यह आमतौर पर मसालेदार, तला-भुना भोजन, अधिक चाय-कॉफी और खाली पेट रहने से होती है। लंबे समय तक रहने वाली एसिडिटी भोजन नली को नुकसान पहुंचा सकती है। यह समस्या अक्सर खराब दिनचर्या, तनाव और अनियमित खानपान से जुड़ी होती है।


एसिडिटी के कारण:

एसिडिटी अधिक मसालेदार, तला-भुना और भारी भोजन खाने से तेजी से बढ़ती है। देर रात खाना, बार-बार चाय–कॉफी पीना, तंबाकू और शराब का सेवन पेट में एसिड को बढ़ाता है। खाली पेट रहना या लंबे समय तक भूखे रहना भी एसिडिटी का मुख्य कारण है। तनाव, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या इससे और अधिक परेशानी पैदा करते हैं। कई दवाइयों के साइड-इफेक्ट भी एसिडिटी बढ़ा सकते हैं। ज्यादा खट्टे और फास्ट फूड का सेवन एसिड को ऊपर उठने का कारण बनता है, जिससे सीने में जलन होती है।


एसिडिटी के लक्षण:

एसिडिटी के प्रमुख लक्षणों में सीने में जलन, खट्टी या खारी डकारें, गले में जलन, पेट दर्द और मुंह कड़वा होना शामिल है। भोजन के बाद पेट भारी लगना, बार–बार डकार आना और गले में खटास भी इसके सामान्य संकेत हैं। कई बार एसिडिटी के कारण उल्टी जैसा महसूस होता है या भोजन सही से पचता नहीं। इसके लक्षण रात में ज्यादा दिखते हैं, खासकर भारी भोजन करने के बाद। लगातार एसिडिटी रहना शरीर में पाचन संबंधित कमजोरी और असंतुलन का संकेत देता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कब्ज, गैस और एसिडिटी के घरेलू उपाय. Home remedies for constipation, gas and acidity.


कब्ज, गैस और एसिडिटी के लिए घरेलू उपाय:


जीरा पानी:

जीरा पानी कब्ज, गैस और एसिडिटी के लिए एक बेहतरीन घरेलू उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और पाचन एंजाइम पाचन को बेहतर बनाते हैं। एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच भुना हुआ जीरा मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से गैस तुरंत कम होती है और पेट हल्का महसूस होता है। जीरा आंतों की सूजन कम करता है और पेट में बनने वाले एसिड को संतुलित करता है। यह कब्ज को दूर करने में भी कारगर है क्योंकि यह आंतों की गति को तेज करता है और मल त्याग को आसान बनाता है।


अजवाइन और काला नमक:

अजवाइन और काला नमक का मिश्रण पाचन समस्याओं के लिए एक शक्तिशाली उपाय है। इसमें मौजूद थाइमोल पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है, जिससे गैस और अपच तुरंत कम होती है। आधा चम्मच अजवाइन में एक चुटकी काला नमक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट की जलन और फुलाव शांत होता है। यह पेट की गैस को बाहर निकालने में मदद करता है और आंतों की रुकावट को दूर करता है। कब्ज की स्थिति में भी यह मिश्रण राहत देता है और पाचन क्रिया को सामान्य करता है। यह उपाय भोजन के बाद भी लिया जा सकता है।


त्रिफला चूर्ण:

त्रिफला चूर्ण कब्ज दूर करने का सबसे प्रसिद्ध आयुर्वेदिक उपचार है। यह हरड़, बहेरा और आंवला से मिलकर बनता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत और संतुलित करते हैं। रात में सोने से पहले एक चम्मच त्रिफला गर्म पानी के साथ लेने से आंतों की सफाई होती है और सुबह पेट आसानी से साफ होता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है, पेट की गैस कम करता है और एसिडिटी को भी नियंत्रित करता है। त्रिफला का नियमित सेवन पाचन शक्ति बढ़ाता है और पेट संबंधी समस्याओं को प्राकृतिक रूप से दूर रखता है।


गर्म पानी:

सुबह खाली पेट गर्म पानी पीना पाचन तंत्र के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह आंतों में जमा हुई गंदगी को बाहर निकालता है और मल को मुलायम बनाकर कब्ज को दूर करता है। गर्म पानी पेट में जमा गैस को भी कम करता है और पेट की सूजन शांत करता है। एसिडिटी होने पर धीरे-धीरे गुनगुना पानी पीने से पेट में बनने वाला एसिड संतुलित होता है और सीने की जलन कम हो जाती है। दिनभर हल्का गर्म पानी पीते रहने से पाचन क्रिया सक्रिय रहती है और पेट हल्का महसूस होता है। यह एक सरल लेकिन असरदार उपाय है।


दही और छाछ:

दही और छाछ दोनों ही प्राकृतिक प्रोबायोटिक हैं, जो पाचन को मजबूत बनाते हैं और पेट की गर्मी को नियंत्रित करते हैं। छाछ में भुना जीरा और काला नमक मिलाकर पीने से गैस, एसिडिटी और पेट की जलन तुरंत कम हो जाती है। दही पेट को ठंडक देता है और खट्टी डकारों को कम करता है। ये अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाकर पाचन में सुधार करते हैं। कब्ज की समस्या में भी नियमित छाछ फायदेमंद होती है क्योंकि यह आंतों को चिकनाई प्रदान करती है और मल त्याग को आसान बनाती है। गर्मियों में यह और भी ज्यादा फायदा पहुंचाता है।


नींबू पानी:

नींबू पानी पाचन तंत्र के लिए एक प्राकृतिक डिटॉक्स की तरह काम करता है। सुबह गर्म पानी में नींबू मिलाकर पीने से आंतें सक्रिय होती हैं और कब्ज दूर होती है। नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड पेट के एसिड को संतुलित करता है, जिससे एसिडिटी और खट्टी डकारें कम होती हैं। यह गैस को बाहर निकालने में भी मदद करता है और पेट हल्का महसूस होता है। नींबू पानी शरीर से टॉक्सिन हटाता है, पाचन एंजाइम को बढ़ाता है और भूख बेहतर बनाता है। इसे रोज पीना पेट की समस्याओं को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करता है।


इसबगोल:

इसबगोल कब्ज का सबसे असरदार घरेलू उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर आंतों में पानी सोखकर मल को मुलायम बनाता है और आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है। एक चम्मच इसबगोल को गुनगुने पानी या दूध के साथ रात में लेने से सुबह पेट पूरी तरह साफ हो जाता है। यह गैस और एसिडिटी में भी राहत देता है, क्योंकि यह पेट की अतिरिक्त एसिडिटी को सोख लेता है। इसबगोल आंतों की सफाई करता है और पाचन को बेहतर बनाता है। यह पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय है।


अदरक का सेवन:

अदरक पाचन तंत्र को संतुलित रखने के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसमें मौजूद जिंजरोल पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है, जिससे गैस, अपच और पेट दर्द जल्दी कम होते हैं। अदरक की चाय या अदरक-शहद का सेवन एसिडिटी को शांत करता है और खट्टी डकारों से राहत देता है। यह पेट में गर्मी को नियंत्रित कर पाचन प्रक्रिया को तेज करता है। कब्ज की समस्या में भी अदरक फायदेमंद है क्योंकि यह आंतों की गतिशीलता बढ़ाता है। भोजन के बाद थोड़ा सा अदरक चबाना पाचन को आसान बनाता है और पेट की सूजन दूर करता है।


केला:

केला फाइबर से भरपूर होता है, जो कब्ज दूर करने में बेहद प्रभावी है। इसमें मौजूद पेक्टिन आंतों को चिकनाई देता है और मल को मुलायम बनाकर आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है। गैस और भारीपन की समस्या में भी केला तुरंत राहत देता है। इसका प्राकृतिक एंटासिड पेट में जलन और एसिडिटी को कम करता है। केला पचने में आसान होता है और यह भूख बढ़ाने में भी मदद करता है। इसे सुबह नाश्ते में या रात सोने से पहले खाया जा सकता है। यह पेट को शांत, ठंडा और हल्का महसूस कराता है।


भिगोए हुए किशमिश:

भिगोए हुए किशमिश पाचन के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। रात में 6–8 किशमिश पानी में भिगोकर सुबह खाने से आंतें चिकनी होती हैं और कब्ज दूर होती है। किशमिश में प्राकृतिक फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो भोजन को तेजी से पचाने में मदद करते हैं। यह पेट की गैस कम करता है और एसिडिटी को भी नियंत्रित करता है क्योंकि यह शरीर की गर्मी को घटाता है। भिगोए हुए किशमिश शरीर को ऊर्जा देते हैं और पाचन को मजबूत बनाते हैं। कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए यह बेहद लाभदायक घरेलू उपाय है।


आहार संबंधी सुझाव:


फाइबर युक्त भोजन:

फाइबर युक्त भोजन कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आहार में साबुत अनाज, दालें, सब्जियां, फल और सलाद शामिल करने से पाचन बेहतर होता है और मल त्याग आसानी से होता है। फाइबर आंतों को स्वस्थ रखता है और पेट साफ करने में मदद करता है। यह गैस बनने से रोकता है और एसिडिटी को भी कम करता है क्योंकि यह भोजन को धीरे-धीरे पचने देता है। फाइबर युक्त भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और भूख को नियंत्रित करता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर तरीके से कार्य करता है।


पानी का सही मात्रा में सेवन:

पर्याप्त पानी पीना पाचन तंत्र के लिए सबसे जरूरी आदतों में से एक है। पानी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालता है, आंतों को हाइड्रेट रखता है और मल को मुलायम बनाकर कब्ज रोकता है। दिनभर 7–8 गिलास पानी पीने से गैस और एसिडिटी की समस्या कम होती है क्योंकि यह पेट की गर्मी को नियंत्रित करता है। भोजन के बाद ज्यादा पानी पीने से बचना चाहिए, लेकिन दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना फायदेमंद है। गुनगुना पानी पीना पाचन में और अधिक सहायक होता है और पेट फूलने की समस्या को भी कम करता है।


नियमित व्यायाम:

नियमित व्यायाम पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है और कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं को काफी हद तक कम करता है। रोज 20–30 मिनट की वॉक, योग या हल्का व्यायाम आंतों की गति को सुधारता है और भोजन को जल्दी पचाता है। व्यायाम से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है। तनाव कम होता है, भूख सही लगती है और पेट हल्का रहता है। खासकर ताड़ासन, पवनमुक्तासन और भुजंगासन जैसे योगासन गैस और कब्ज को दूर करने में बहुत प्रभावी हैं। नियमित व्यायाम स्वस्थ पाचन का आधार है।


तनाव कम करें:

तनाव पाचन तंत्र को सबसे अधिक प्रभावित करता है। लगातार तनाव रहने से शरीर में गैस, एसिडिटी और अपच की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि तनाव आंतों की गति को धीमा कर देता है। तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन, योग, गहरी सांसें लेना और पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। दिनभर मानसिक दबाव कम रहने पर पाचन एंजाइम सही तरीके से काम करते हैं और भोजन अच्छी तरह पचता है। तनाव नियंत्रित करने से भूख सही लगती है और पेट की समस्याएँ कम होती हैं। थोड़ी-सी लाइफस्टाइल में बदलाव से पाचन बेहतर होता है और शरीर ज्यादा स्वस्थ रहता है।


भोजन समय पर करें:

भोजन समय पर करना पाचन के लिए सबसे जरूरी आदतों में से एक है। अनियमित समय पर खाने से पेट में गैस, अपच और एसिडिटी जल्दी बनती है। सुबह का नाश्ता समय पर करना, दोपहर और रात का खाना नियमित समय पर लेना आंतों की कार्यक्षमता सुधारता है। देर रात भारी भोजन से बचना चाहिए क्योंकि इससे पेट में एसिड बढ़ता है और एसिडिटी होने की संभावना ज्यादा होती है। समय पर भोजन करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है, भूख सही लगती है और पेट हल्का रहता है। यह आदत शरीर की प्राकृतिक पाचन लय को संतुलित रखती है।


निष्कर्ष:

कब्ज, गैस और एसिडिटी आम समस्याएँ हैं लेकिन सही खानपान, अच्छी दिनचर्या और कुछ सरल घरेलू उपाय अपनाकर इनसे आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

कब्ज, गैस और एसिडिटी के घरेलू उपाय. Home remedies for constipation, gas and acidity.


अस्वीकरण: 

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और घरेलू उपचारों के सुझाव देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें बताए गए सभी उपाय प्राकृतिक और सामान्यतः सुरक्षित होते हैं, लेकिन हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया कर सकता है। यदि आपको लंबे समय से कब्ज, अत्यधिक गैस, लगातार एसिडिटी, या पेट दर्द, खून आना, उल्टी, वजन कम होना जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। तुरंत किसी योग्य डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। अधिक जानकारी के लिए स्वास्थ्य सुझाव और जानकारी की अस्वीकरण नीति को पढ़ें। लेख को अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।


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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):

कब्ज, गैस और एसिडिटी को जड़ से खत्म करने के क्या उपाय हैं?

कब्ज, गैस और एसिडिटी को जड़ से खत्म करने के लिए रोज सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पिएं, भोजन में फाइबर बढ़ाएं, तैलीय और मसालेदार भोजन कम करें, रात को सोने से पहले त्रिफला चूर्ण या इसबगोल का सेवन करें। नियमित रूप से टहलना, योग में पवनमुक्तासन और भुजंगासन जैसे आसन करना पाचन को मजबूत बनाते हैं। तनाव कम करना, दिन में पर्याप्त पानी पीना और भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाना भी इन समस्याओं को स्थायी रूप से दूर करता है।

एसिडिटी का रामबाण इलाज क्या है?

एसिडिटी के लिए नींबू पानी, नारियल पानी, ठंडी छाछ, अजवाइन और थोड़े से काले नमक का सेवन रामबाण माना जाता है। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पाचन सुधारता है और एसिड बनना कम करता है। अदरक, तुलसी की पत्तियां और सौंफ पाचक रसों को संतुलित रखती हैं। भोजन में बार-बार छोटे-छोटे मील लें और तेज मसाले, चाय-कॉफी, जंक फूड से दूरी रखें। यह उपाय एसिडिटी को तेज़ी से शांत करने में अत्यंत प्रभावी होते हैं।

गैस, कब्ज एसिडिटी के घरेलू उपचार?

गैस, कब्ज और एसिडिटी में गुनगुना पानी, जीरा पानी, अजवाइन-काला नमक, त्रिफला चूर्ण और दही-छाछ का सेवन सबसे प्रभावी घरेलू उपचार हैं। अदरक और सौंफ पेट को आराम देते हैं और गैस बनने से रोकते हैं। इसबगोल कब्ज में तेजी से राहत देता है। नींबू पानी पाचन सुधरता है और एसिडिटी घटाता है। रात को हल्का भोजन करें, सोने से पहले 10 मिनट टहलें और पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं। ये उपाय समस्याओं को प्राकृतिक रूप से दूर करते हैं।

गैस और कब्ज की आयुर्वेदिक दवा?

गैस और कब्ज के लिए आयुर्वेद में त्रिफला चूर्ण, इसबगोल भूसी, अविपत्तिकर चूर्ण, हरिद्राखंड, हिंगवटा रस, कुटजारिष्ट और दशमूलारिष्ट जैसी दवाएं प्रचलित हैं। त्रिफला पेट साफ करता है, जबकि इसबगोल मल को मुलायम बनाकर कब्ज दूर करने में मदद करता है। आयुर्वेदिक दवाएं पाचन अग्नि को मजबूत बनाती हैं और गैस को जड़ से खत्म करती हैं। किसी भी आयुर्वेदिक दवा का नियमित सेवन डॉक्टर या वैद्य की सलाह से ही करना चाहिए।

गैस और एसिडिटी के लिए कौन सी दवा रामबाण है?

गैस और एसिडिटी के लिए हिंगवटी, अविपत्तिकर चूर्ण, सौंफ जल, जीरा पानी, अजवाइन-नमक मिश्रण और अवलेह जैसे आयुर्वेदिक उपाय रामबाण माने जाते हैं। ये पेट के अम्ल को संतुलित करते हैं, गैस बनने से रोकते हैं और पाचन को मजबूत बनाते हैं। छाछ, नारियल पानी और ठंडा दूध भी त्वरित राहत देते हैं। तेज मसाले, तले भोजन और देर रात खाना छोड़कर नियमित दिनचर्या अपनाने से गैस और एसिडिटी लंबे समय तक नहीं होती।

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